Dadasaheb Phalke Death Anniversary: भारतीय सिनेमा के जनक से जुड़ी ये 10 बातें हर किसी को जाननी चाहिए

दादा साहेब फाल्के ने अपने करियर में 95 फिल्में और 27 लघु फिल्में बनाई. उन्होंने पहली फूल-लेंथ फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाई. जिसे भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म भी कहा जाता हैं.

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Dadasaheb Phalke Death Anniversary: भारतीय सिनेमा के जनक से जुड़ी ये 10 बातें हर किसी को जाननी चाहिए
आज हिंदी सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादा साहेब फाल्के की आज पुण्यतिथि है. 16 फरवरी 1944 को उनका निधन हो गया था. दादा साहेब फाल्के ने भारत में फिल्मों को पहचान दी. इसलिए उन्हें भारतीय सिनेमा का जनक भी माना जाता हैं. 30 अप्रैल, 1870 को दादा साहेब फाल्के का जन्म नासिक में हुआ था. उनके पिता संस्कृत के बहुत विद्वान व्यक्ति थे. जिसके बाद उनका परिवार मुंबई आ गया. दादा साहेब फाल्के को कला में काफी रुचि थी जिसके कारण उन्होंने बंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्समें दाखिला ले लिया. फाल्के ने अपने करियर में 95 फिल्में और 27 लघु फिल्में बनाई. उन्होंने पहली फूल-लेंथ फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाई. जिसे भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म भी कहा जाता हैं. दादा साहेब फाल्के की इस पुण्यतिथि पर आइए जानते है उनसे जुड़ी 10 रोचक बातें.

1:  दुनिया जिसे दादा साहेब फाल्के के नाम से जानती हैं उनका असली नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था.

2: दादा ने नाटक कंपनी में चित्रकार और पुरात्तव विभाग में फोटोग्राफर के तौर पर काम भी किया लेकिन इन कामों में जब मन नहीं लगा तो उन्होंने फिल्म बनाने की सोची. जिसकी जानकारी के लिए वो दोस्त से पैसे लेकर लंदन चले गए.  

3: दादा साहेब फाल्के को वन मैन आर्मी भी कहा जाता है क्योंकि वो निर्माता, निर्देशक, कथाकार, सेट डिजाइनर, ड्रेस डिजाइनर, वितरक व संपादक तक रहे चुके हैं.


4: लंदन से लौट कर भारत आए दादा साहेब फाल्के भारत आए और 'राजा हरिश्चंद्र' बनाने की तैयारी की तो उनके सामने सबसे बड़ी मुसीबत ये थी कि उनकी फिल्म के लिए उन्हें कोई हिरोइन नहीं मिल रही थी.

5: फिल्म में रानी तारामति का रोल निभाने के लिए जब कोई भी महिला तैयार नहीं हुई तो फाल्के ने अन्ना सालुंके नाम के पुरुष बावर्ची को इस रोल के लिए तैयार किया. इस रोल के लिए उन्हें 15 रुपए मिले थे.

6: इस पूरी फिल्म को पूरा बनाने 8 महीने के करीब का वक्त लगा इसके साथ ही तब के वक्त में 15 हजार रुपए लगे थे जो उस समय की एक बड़ी रकम थी. 


7: दादा साहेब की फिल्म 'राजा हरिश्चिंद्र' 3 मई, 1913 को मुंबई के कोरनेशन सिनेमा में रिलीज हुई. 40 मिनट की यह फिल्म टिकट विंडो पर सुपरहिट रही. 

8: दादा साहेब के काम की तारीफ़ सिर्फ देश ही नहीं विदेश तक में होती थी. लंदन के फिल्मकारों ने उन्हें अपनी फिल्म बनाने का ऑफर दिया लेकिन दादा साहेब फाल्के ने मना कर दिया.

9: दादा साहेब फाल्के की आखिरी फिल्म ‘गंगावतरण’ थी. ये एक बोलती फिल्म थी. 

10: 16 फरवरी, 1944 को नासिक में आखिरी सांस लेने वाले दादा साहेब बहुत बड़े देशभक्त भी थे. सिनेमा में उनके योगदान के लिए उनके नाम से हर साल भारतीय सिनेमा से जुड़ी किसी एक हस्ती को दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया जाता हैं.

Image Credit: Twitter/Film History Pics

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