Vinod Khanna's Birth Anniversary: बॉलीवुड के बड़े सुपर स्टार बन सकते थे विनोद खन्ना, एक फैसले ने लगा दिया ब्रेक

आज बॉलीवुड के सबसे हैंडसम एक्टर रहे विनोद खन्ना का 72वां जन्मदिन हैं. वो आज भले ही हमारे बीच ना हो लेकिन अपने काम के दम पर सालों साल तक उनकी बातें होती रहेंगी.

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Vinod Khanna's Birth Anniversary: बॉलीवुड के बड़े सुपर स्टार बन सकते थे विनोद खन्ना, एक फैसले ने लगा दिया ब्रेक

साल 2017 में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के महान कलाकार विनोद खन्ना ने भले ही दुनिया को अलविदा कह दिया हो. लेकिन बॉलीवुड की दुनिया में विनोद खन्ना का नाम हमेशा ही अमर रहेगा. इंडस्ट्री में उनकी पहचान हमेशा से एक खूबसूरत एक्टर के तौर पर होती रही है जिस पर फैंस जान छिड़कते थे. उन्हें भविष्य का सुपरस्टार माना जाता था. क्योंकि फ़िल्मी दुनिया में कदम रखते ही उन्होंने एक बाद एक कई बेहतरीन फिल्में दी. लेकिन अपनी प्रतिभा के मुताबिक विनोद खन्ना ने कामयाबी नहीं पायी इसकी बड़ी वजह थी उनका एक ऐसा फैसला जिसने उनके करियर में बड़ा ब्रेक लगा दिया. कहा जाता है कि अगर विनोद खन्ना ने वो फैसला नहीं लिया होता अमिताभ बच्चन की तरह वो भी सुपरस्टार होते. विनोद खन्ना के 72वें जन्मदिन पर आइए जानते है उनसे जुड़ी कुछ अहम बातें.

 

साल 1969 में आई फिल्म मन का मीतसे सिल्वर स्क्रीन पर एक ऐसे विलेन ने कदम रखा. जो दिखता हीरो जैसा था. वैसे तो सुनील दत्त ने यह फिल्म अपने भाई को लांच करने के लिए बनाई थी. लेकिन जब ये फिल्म रिलीज हुई तो चर्चा विनोद खन्ना की होने लगी. जिसके बाद उन्हें काफी फिल्मो में ऑफर मिलने लगे. गुलजार द्वारा निर्देशित मेरे अपने’ (1971) से विनोद खन्ना सही मायने में पहली बार एक नायक के तौर पर नजर आए.



विनोद खन्‍ना ऐसे एक्टर थे जो किसी भी बड़े सितारे के साथ फिल्म करने से नहीं कतराते थे. वो बड़े सितारों के बतौर सहायक अभिनेता या विलेन के तौर पर राजेश खन्‍ना, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्‍चन जैसे सितारों के साथ काम करते. लेकिन उनका अभिनय इतना लाजवाब था कि परदे पर पता ही नहीं चलता कि वो लीड रोल में नहीं हैं.



अमिताभ बच्चन के साथ विनोद खन्ना के टक्कर की बात होती थी. दोनों ने एक साथ कई फिल्में कि जैसे परवरिश, खून-पसीना, हेरा-फेरी, मुकद्दर का सिकंदर और अमर अकबर अंथोनी. दोनों एक-दूसरे से कम नहीं लगते थे. इसलिए दोनों के टकराव की खबरें खूब होती लेकिन विनोद खन्ना ने एक इंटरव्यू में साफ़ कहा था कि हम दोनों एक-दूसरे के प्रतियोगी हैं प्रतिद्वंद्वी नहीं.



लेकिन साल 1982 में फिल्‍मी दुनिया छोड़कर विनोद खन्ना आचार्य रजनीश (ओशो) के साथ अमेरिका जाकर उनके आश्रम में रहने लगे. उनके इस फैसले ने सभी को हैरान कर दिया. कहा जाता है कि विनोद खन्ना वहां आम लोगों की तरह रहते थे बर्तन धोने के साथ वो माली का भी काम करते थे.



हालंकि अपने इस फैसले को बदलते हुए वो पांच साल बाद फिल्म इंडस्ट्री में लौट आये लेकिन उनकी इस बार विनोद खन्ना की चमक थोड़ी फीकी थी. कहा जाता है कि विनोद खन्ना ने अपने करियर में ब्रेक लेने का फैसला ना लिया होता तो शायद वो अमिताभ बच्चन की तरह बड़े स्टार होते.

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