गंभीर बिमारी से लड़ते हुए इरफान खान ने लिखा बेहद इमोशनल लेटर, कहा- मैं फिर से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता हूं

कुछ महीने पहले इरफान ने खुलासा किया था कि वो न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे हैं. लंबे समय से उनकी कोई खबर नहीं थी लेकिन अब महीनों बाद इरफान ने अपने इस सफ़र के बारे में एक जानेमाने अखबार को पत्र लिखा है.

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गंभीर बिमारी से लड़ते हुए इरफान खान ने लिखा बेहद इमोशनल लेटर, कहा- मैं फिर से अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता हूं

बॉलीवुड स्टार इरफान खान पिछले कुछ महीनो से फिल्म इंडस्ट्री से दूर हैं. कुछ महीने पहले इरफान ने खुलासा किया था कि वो न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे हैं. अपनी बिमारी के इलाज के चलते वो फिलहाल लंदन में हैं. उनके फैन्स को उनकी चिंता लगातार लगी हुई है. उनके सोशल मीडिया पर भी कोई उपडेट नहीं थी लेकिन अब महीनों बाद इरफान ने अपने इस सफ़र के बारे में एक जानेमाने अखबार को पत्र लिखा है.

इरफान का पत्र पढ़ आप यक़ीनन इमोशनल हो जाएंगे. इरफान ने लिखा, “कुछ महीने पहले अचानक मुझे पता चला कि मैं न्यूरोएन्डोक्राइन कैंसर से ग्रस्त हूं. यह शब्द मैंने पहली बार सुना था. जब मैंने इसके बारे में सर्च की तो पाया कि इस पर ज्यादा शोध नहीं हुए हैं. इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी मौजूद नहीं थी. यह एक दुर्लभ शारीरिक अवस्था का नाम है और इस वजह से इसके उपचार की अनिश्चितता ज्यादा है. अभी तक मैं तेज रफ्तार वाली ट्रेन में सफर कर रहा था  मेरे कुछ सपने थे, कुछ योजनाएं थीं, कुछ इच्छाएं थीं, कोई लक्ष्य था.फिर किसी ने मुझे हिलाकर जगा दिया . मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो टीसी था. उसने कहा आपका स्टेशन आ गया है. कृपया नीचे उतर जाइए. मैं कंफ्यूज था. मैंने कहा- नहीं नहीं अभी मेरा स्टेशन नहीं आया . उसने कहा- नहीं आपको अगले किसी भी स्टॉप पर उतरना होगा.


इस डर और दर्द के बीच मैं अपने बेटे से कहता हूं, मैं किसी भी हालत में ठीक होना चाहता हूं. मुझे अपने पैरों पर वापस खड़े होना है. मुझे ये डर और दर्द नहीं चाहिए . जब मैं पहली बार दर्द के साथ अस्पताल में गया, मुझे लंबे वक्त तक इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि मेरे बचपन का सपना लॉर्ड्स स्टेड‍ियम मेरे अस्पताल के पास बना है. जब मैं अस्पताल की बालकनी पर खड़ा होता था तो एक तरफ स्टेडियम में लगी क्रिकेटर विवयन रिचर्ड्स की मुस्कुराती तस्वीर देखता. एक तरफ मेरा अस्पताल था, दूसरी तरफ स्टेडियम. इस बीच एक सड़क थी जो मुझे जिंदगी और मौत के बीच का रास्ता जैसा लग रही थी. अस्पताल में मेरे कमरे के पास ही कोमा वॉर्ड बना हुआ था. लेकिन ये सारी चीजें मुझे बस ये एहसास करा रहीं थी कि जिंदगी में अनिश्चित ही निश्चित है. मुझे पहली बार असल मायने में एहसास हुआ की आजादी का मतलब क्या है.

 इस सफर में सारी दुनिया के लोग... सभी मेरे सेहतमंद होने की दुआ कर रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं, मैं जिन्हें जानता हूं और जिन्हें नहीं जानता हूं, वे सभी अलग-अलग जगहों पर मेरे लिए प्रार्थना कर रहे हैं. सबकी दुआएं एक फोर्स बनकर मेरे स्पाइनल कॉर्ड के जर‍िए अंदर आते हुए स‍िर तक जा रही हैं. मैं जिंदगी को बहुत करीब से महसूस कर रहा हूं"

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