अंतिम क्षणों में कादर खान लगाना चाहते थे बेटे को गले, लेकिन नहीं लगा पाए- देखें वीडियो

पिता को अंतिम विदाई देते हुए छलके बेटे की आंखो से आंसू, कहा पिता आखिरी बार गले लगाकर करना चाहते थे प्यार, पर नहीं कर पाए. देखें वीडियो

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अंतिम क्षणों में कादर खान लगाना चाहते थे बेटे को गले, लेकिन नहीं लगा पाए- देखें वीडियो

कादर खान के बड़े बेटे सरफ़राज़, टोरंटो के शमशान भूमि में अपने पिता को अंतिम विदाई देते वक़्त अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए. अपने पिता की बातों को याद करके उनकी आंखों से आंसू नहीं रुके. सरफ़राज़ ने हॉस्पिटल में हुई अपने और पिता कादर खान के बीच की बातों को याद करते हुए बताया कि जब अपने आखिरी समय में वे कनाडा के हॉस्पिटल में थे, तो उन्होंने अपने पिता से उनके गाल पर किस करने के लिए कहा. कादर साहब  अपने बेटे को किस करने के लिए  उठने की कोशिश की, पर वह असफल रहें.

शमशान भूमि से बात करते हुए सरफ़राज़ ने ये भी कहा कि गोविंदा
, शक्ति कपूर और डेविड धवन ने पिता की मौत की खबर सुनने के बाद उन्हें फोन किया. वरिष्ठ अभिनेता कादर खान के पार्थिव शरीर को शुक्रवार की रात 12 बजे टोरंटो के शमशान भूमि में दफनाया गया. उनकी अंतिम यात्रा को देखने के लिए कई लोग इकट्ठा हुए, जो यह स्पष्ट तौर पर दर्शाता है कि कादर खान न सिर्फ इंडिया में बल्कि कनाड़ा में भी बहुत फेमस थे. सूत्रों के मुताबिक जब लोगों को जब यह पता लगा की वो हॉस्पिटल में एडमिट है तब लोग उन्हें देखना चाहते थे.

कादर खान की तबियत तब ज्यादा बिगड़ गयी जब वह उसी घुटने पर दोबारा गिर पड़े जिसका उन्होंने मुंबई में ऑपरेशन करवाया था. लेकिन उसके बाद वह
PSP (पोग्रेसिव सूप्रान्यूक्लियर पाल्सी ) नामक बीमारी के शिकार हो गए, जिसे स्टील-रिचर्डसन-ओल्स्ज़वेस्की सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है. यह एक ऐसी बीमारी है, जो आपके दिमाग में विशिष्ट संस्करणों की क्रमिक गिरावट और मृत्यु को शामिल करती है. संतुलन की कमीं, चाल धीमी होना, आंखो को हिलाने में कठिनाई महसूस करना, और मनोभ्रंश होना इसके लक्षण हैं.



स्पॉटबॉय.कॉम के यह दुखद भरी खबर देने के बाद अमिताभ बच्चन ने सबसे पहले ट्वीट किया. देखिये यह तस्वीर:


काफी समय पहले स्पॉटबॉय से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान सरफ़राज़ ने अपने बीमार पिता के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पिता को कुछ चीज़ें समझने में तकलीफ होती थी. उन्होंने यह भी बताया की इंडस्ट्री बहुत ही अलग तरीके से काम करने लग गयी थी, दोस्ती यारी ख़त्म हो चुकी थी, सिर्फ लोग काम से काम रखते थे. वो इस बदलाव को अपना नहीं पाए. उनके बहुत सारे शुभ-चिंतकों ने उन्हें ये समझाने की कोशिश की पर वह अड़े रहें। बदलाव को हमेशा अपनाया नहीं जाता, ये उन लोगों के दिमाग में कौन डालेगा जो बिना किसी भावनाओं के ऐसी बातें करते हैं.
kader khan


Image Source:- Youtube/bbcnewspunjabi,firstpost,indiawest

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