मैंने अपने करियर में अच्छी-बुरी दोनों तरह की तमाम समीक्षाएं देखी हैं: अनुपम खेर

अभिनेता अनुपम खेर की फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' इस शुक्रवार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म को क्रिटिक्स से मिक्स रिव्यू मिला है.

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मैंने अपने करियर में अच्छी-बुरी दोनों तरह की तमाम समीक्षाएं देखी हैं: अनुपम खेर

अभिनेता अनुपम खेर की फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' इस शुक्रवार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म को क्रिटिक्स से मिक्स रिव्यू मिला है. तो वहीं बॉक्स ऑफिस पर भी इस फिल्म को धीमी शुरुआत मिली है. पहले दो दिन में ये फिल्म 9 करोड़ के करीब का बिजनेस कर पाई है. ऐसे में अनुपम खेर का कहना है कि नकारात्मक समीक्षा की अधिक परवाह नहीं करते.

अनुपम ने तीन महीने के लिए विदेश यात्रा पर जाने से पहले कहा, "कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या करते हैं, लोग आपकी गिराने की कोशिश करेंगे. आलोचना हमेशा से देश में दिल बहलाव का जरिया रहा है. अब फिल्म आलोचना भी भारतीयों के लिए स्व-मनोरंजन का एक बड़ा स्रोत बन गई है. मैं आलोचना या फिल्म आलोचना को दिल पे नहीं लेता. अंतत: यह सिर्फ किसी पुरुष या महिला की राय होती है और मैंने अपने करियर में अच्छी-बुरी दोनों तरह की तमाम समीक्षाएं देखी हैं."

मनमोहन सिंह का किरदार निभाने को लेकर अनुपम की जिस तरह से तीखी आलोचना हुई है, वह उससे चकित हैं. उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि कुछ आलोचकों का राजनीतिक एजेंडा हमारी अपेक्षा से कहीं बहुत बड़ा है. टिप्पणियां अनुचित और अप्रासंगिक हैं. मैं डॉ. मनमोहन सिंह को उस गरिमा और सम्मान के साथ चित्रित करना चाहता था, जिसके वे हकदार हैं. और मुझे लगता है कि मैं इसमें सफल रहा हूं. मुझे कम से कम अभिनेता के रूप में थोड़ा अनुभव और समझ है."

वह 'न्यू एम्स्टर्डम' श्रंखला के नए सत्र की शूटिंग के लिए अगले तीन महीने अमेरिका में रहेंगे. उन्होंने कहा, "मैं विजय कपूर नामक एक भारतीय चिकित्सक का एक मुख्य किरदार निभा रहा हूं. यह दुनिया का एक सबसे लोकप्रिय धारावाहिक है. मैं अपने अगले तीन महीने पूरी तरह इस श्रंखला के लिए समर्पित कर रहा हूं."

'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' की समीक्षाओं के बारे में अनुपम के क्या विचार हैंउन्होंने कहा, "हमने एक ऐसे नायक की कहानी बताने की कोशिश की है, जो उस दर्जे के राजनीज्ञ नहीं थे, जितना होने की जरूरत थी. यह फिल्म डॉ. सिंह के राजनीतिक सलाहकार द्वारा लिखी गई पुस्तक पर आधारित है. लेकिन यह बायोपिक नहीं है. इसमें भारत के राजनीति के 10 महत्वपूर्ण वर्षो को दर्शाया गया है. आप फिल्म के बारे में भले ही ज्यादा न सोचें, लेकिन देश के फिल्मी दर्शकों की समझ को कम मत आंकिए."

आईएएनएस से इनपुट लेकर 

Image Credit: IANS

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